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द्रोण पर्व
अध्याय ९२
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सञ्जय़ उवाच
स वध्यमानः समरे शैनेय़स्य शरोत्तमैः |  २३   क
प्राद्रवत्सहसा राजन्पुत्रो दुर्योधनस्तव |  २३   ख
आप्लुतश्च ततो यानं चित्रसेनस्य धन्विनः ||  २३   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति