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आदि पर्व
अध्याय ९३
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वैशम्पाय़न उवाच
उशीनरस्य राजर्षेः सत्यसन्धस्य धीमतः |  २२   क
दुहिता प्रथिता लोके मानुषे रूपसम्पदा ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति