उद्योग पर्व  अध्याय १७८

भीष्म उवाच

अर्थे वा यदि वा धर्मे समर्थो देशकालवित् |  २९   क
अनर्थसंशय़ापन्नः श्रेय़ान्निःसंशय़ेन च ||  २९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति