शान्ति पर्व  अध्याय ९३

युधिष्ठिर उवाच

कथं धर्मे स्थातुमिच्छन्राजा वर्तेत धार्मिकः |  १   क
पृच्छामि त्वा कुरुश्रेष्ठ तन्मे व्रूहि पितामह ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति