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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९३
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नकुल उवाच
सव्रह्मचर्यं स्वं गोत्रं समाख्याय़ परस्परम् |  १४   क
कुटीं प्रवेशय़ामासुः क्षुधार्तमतिथिं तदा ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति