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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५४
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वैशम्पाय़न उवाच
यादृशेनेह रूपेण योग्यं दातुं वृतेन वै |  २५   क
तादृशं खलु मे दत्तं त्वं तु तन्नाववुध्यसे ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति