आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ९३

श्वशुर उवाच

सर्वेषां वो द्विजश्रेष्ठ दिव्यं यानमुपस्थितम् |  ८०   क
आरोहत यथाकामं धर्मोऽस्मि द्विज पश्य माम् ||  ८०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति