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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९३
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श्वशुर उवाच
यज्ञं त्वहमिमं श्रुत्वा कुरुराजस्य धीमतः |  ८७   क
आशय़ा परय़ा प्राप्तो न चाहं काञ्चनीकृतः ||  ८७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति