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शल्य पर्व
अध्याय ३७
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वैशम्पाय़न उवाच
व्रह्मादिभिः सुरै राजन्नृषिभिश्च तपोधनैः |  ३६   क
विज्ञप्तो वै महादेव ऋषेरर्थे नराधिप |  ३६   ख
नाय़ं नृत्येद्यथा देव तथा त्वं कर्तुमर्हसि ||  ३६   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति