उद्योग पर्व  अध्याय ९३

वैशम्पाय़न उवाच

जीमूत इव घर्मान्ते सर्वां संश्रावय़न्सभाम् |  २   क
धृतराष्ट्रमभिप्रेक्ष्य समभाषत माधवः ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति