उद्योग पर्व  अध्याय ९३

वैशम्पाय़न उवाच

संय़ुगे वै महाराज दृश्यते सुमहान्क्षय़ः |  २८   क
क्षय़े चोभय़तो राजन्कं धर्ममनुपश्यसि ||  २८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति