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उद्योग पर्व
अध्याय ९३
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वैशम्पाय़न उवाच
विद्धो धर्मो ह्यधर्मेण सभां यत्र प्रपद्यते |  ४९   क
न चास्य शल्यं कृन्तन्ति विद्धास्तत्र सभासदः |  ४९   ख
धर्म एतानारुजति यथा नद्यनुकूलजान् ||  ४९   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति