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भीष्म पर्व
अध्याय ९३
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सञ्जय़ उवाच
सम्प्राप्य तु ततो राजा भीष्मस्य सदनं शुभम् |  ३३   क
अवतीर्य हय़ाच्चापि भीष्मं प्राप्य जनेश्वरः ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति