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द्रोण पर्व
अध्याय ९३
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सञ्जय़ उवाच
तथः शक्तिं गृहीत्वा तु रुक्मदण्डामय़स्मय़ीम् |  १९   क
तरसा प्रेषय़ामास माधवस्य रथं प्रति ||  १९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति