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द्रोण पर्व
अध्याय ८१
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सञ्जय़ उवाच
स कृच्छ्रं परमं प्राप्तो धर्मराजो युधिष्ठिरः |  २६   क
त्यक्त्वा तत्कार्मुकं छिन्नं भारद्वाजेन संय़ुगे |  २६   ख
आददेऽन्यद्धनुर्दिव्यं भारघ्नं वेगवत्तरम् ||  २६   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति