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द्रोण पर्व
अध्याय ९३
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सञ्जय़ उवाच
पाण्डुपाञ्चालसम्भग्नं व्यूहमालोक्य वीर्यवान् |  ३४   क
शैनेय़े नाकरोद्यत्नं व्यूहस्यैवाभिरक्षणे ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति