वन पर्व  अध्याय ६६

सुदेव उवाच

अनेन वपुषा वाला पिप्लुनानेन चैव ह |  ८   क
लक्षितेय़ं मय़ा देवी पिहितोऽग्निरिवोष्मणा ||  ८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति