आदि पर्व  अध्याय ९४

वैशम्पाय़न उवाच

स एवं शन्तनुर्धीमान्देवराजर्षिसत्कृतः |  १   क
धर्मात्मा सर्वलोकेषु सत्यवागिति विश्रुतः ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति