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अनुशासन पर्व
अध्याय ८१
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श्रीरु उवाच
अवज्ञाता भविष्यामि सर्वलोकेषु मानदाः |  १८   क
प्रत्याख्यानेन युष्माभिः प्रसादः क्रिय़तामिति ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति