आदि पर्व  अध्याय ९४

देवव्रत उवाच

दाशराज निवोधेदं वचनं मे नृपोत्तम |  ८६   क
शृण्वतां भूमिपालानां यद्व्रवीमि पितुः कृते ||  ८६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति