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शान्ति पर्व
अध्याय ९४
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वामदेव उवाच
नापत्रपेत प्रश्नेषु नाभिभव्यां गिरं सृजेत् |  १०   क
न त्वरेत न चासूय़ेत्तथा सङ्गृह्यते परः ||  १०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति