menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शान्ति पर्व
अध्याय ९४
chevron_left
chevron_right
वामदेव उवाच
यद्वृत्तिमुपजीवन्ति प्रकृतिस्थस्य मानवाः |  ३   क
तदेव विषमस्थस्य स्वजनोऽपि न मृष्यते ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति