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शान्ति पर्व
अध्याय ९४
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वामदेव उवाच
यः कल्याणगुणाञ्ज्ञातीन्द्वेषान्नैवाभिमन्यते |  ३२   क
अदृढात्मा दृढक्रोधो नास्यार्थो रमतेऽन्तिके ||  ३२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति