शान्ति पर्व  अध्याय ९४

वामदेव उवाच

के मानुरक्ता राजानः के भय़ात्समुपाश्रिताः |  ३५   क
मध्यस्थदोषाः के चैषामिति नित्यं विचिन्तय़ेत् ||  ३५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति