menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शान्ति पर्व
अध्याय ९४
chevron_left
chevron_right
वामदेव उवाच
योऽत्यन्ताचरितां वृत्तिं क्षत्रिय़ो नानुवर्तते |  ५   क
जितानामजितानां च क्षत्रधर्मादपैति सः ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति