अनुशासन पर्व  अध्याय ९४

भीष्म उवाच

अटमानोऽथ तान्मार्गे पचमानान्महीपतिः |  १२   क
राजा शैव्यो वृषादर्भिः क्लिश्यमानान्ददर्श ह ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति