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शान्ति पर्व
अध्याय २५२
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युधिष्ठिर उवाच
महाजना ह्युपावृत्ता राजधर्मं समाश्रिताः |  १७   क
न हि सर्वहितः कश्चिदाचारः सम्प्रदृश्यते ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति