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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९४
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जनमेजय़ उवाच
यथा युधिष्ठिरो राजा भीमार्जुनपुरःसरः |  ५   क
सदृशो देवराजेन समृद्ध्या विक्रमेण च ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति