वन पर्व  अध्याय ९४

वैशम्पाय़न उवाच

ततः सम्प्रस्थितो राजा कौन्तेय़ो भूरिदक्षिणः |  १   क
अगस्त्याश्रममासाद्य दुर्जय़ाय़ामुवास ह ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति