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उद्योग पर्व
अध्याय ९४
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राम उवाच
तमव्रवीन्नरो राजञ्शरण्यः शरणैषिणाम् |  ३१   क
व्रह्मण्यो भव धर्मात्मा मा च स्मैवं पुनः कृथाः ||  ३१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति