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उद्योग पर्व
अध्याय ९४
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राम उवाच
मा च दर्पसमाविष्टः क्षेप्सीः कांश्चित्कदाचन |  ३२   क
अल्पीय़ांसं विशिष्टं वा तत्ते राजन्परं हितम् ||  ३२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति