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आदि पर्व
अध्याय ९५
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वैशम्पाय़न उवाच
स तु चित्राङ्गदः शौर्यात्सर्वांश्चिक्षेप पार्थिवान् |  ६   क
मनुष्यं न हि मेने स कञ्चित्सदृशमात्मनः ||  ६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति