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अनुशासन पर्व
अध्याय ९५
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भीष्म उवाच
कदाचिद्विचरन्तस्ते वृक्षैरविरलैर्वृताम् |  १४   क
शुचिवारिप्रसन्नोदां ददृशुः पद्मिनीं शुभाम् ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति