अनुशासन पर्व  अध्याय ९५

भीष्म उवाच

अथापश्यन्सुपीनांसपाणिपादमुखोदरम् |  २   क
परिव्रजन्तं स्थूलाङ्गं परिव्राजं शुनःसखम् ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति