अनुशासन पर्व  अध्याय ९५

यातुधान्यु उवाच

समय़ेन विसानीतो गृह्णीध्वं कामकारतः |  २३   क
एकैको नाम मे प्रोक्त्वा ततो गृह्णीत माचिरम् ||  २३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति