अनुशासन पर्व  अध्याय ९५

जमदग्निरु उवाच

जाजमद्यजजा नाम मृजा माह जिजाय़िषे |  ३७   क
जमदग्निरिति ख्यातमतो मां विद्धि शोभने ||  ३७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति