सभा पर्व  अध्याय २०

वासुदेव उवाच

यावदेव न सम्वुद्धं तावदेव भवेत्तव |  २०   क
विषह्यमेतदस्माकमतो राजन्व्रवीमि ते ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति