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अनुशासन पर्व
अध्याय ९५
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पशुसख उवाच
सखा सखे यः सख्येय़ः पशूनां च सखा सदा |  ४३   क
गौणं पशुसखेत्येवं विद्धि मामग्निसम्भवे ||  ४३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति