अनुशासन पर्व  अध्याय ९५

शुनःसख उवाच

यातुधानी ह्यतिक्रुद्धा कृत्यैषा वो वधैषिणी |  ७९   क
वृषादर्भिप्रय़ुक्तैषा निहता मे तपोधनाः ||  ७९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति