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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९५
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वैशम्पाय़न उवाच
दिव्याश्चाप्सरसां सङ्घाः सगन्धर्वाः सकिंनराः |  २४   क
विश्वावसुश्च ये चान्ये तेऽप्युपासन्तु वः सदा ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति