आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ९५

वैशम्पाय़न उवाच

यज्ञान्दीक्षास्तथा होमान्यच्चान्यन्मृगय़ामहे |  २८   क
तन्नोऽस्तु स्वकृतैर्यज्ञैर्नान्यतो मृगय़ामहे ||  २८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति