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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९५
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वैशम्पाय़न उवाच
तथा कथय़तामेव देवराजः पुरन्दरः |  ३३   क
ववर्ष सुमहातेजा दृष्ट्वा तस्य तपोवलम् ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति