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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९५
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वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे प्रत्यक्षधर्माणो जितक्रोधा जितेन्द्रिय़ाः |  ८   क
दमे स्थिताश्च ते सर्वे दम्भमोहविवर्जिताः ||  ८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति