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उद्योग पर्व
अध्याय ९५
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वैशम्पाय़न उवाच
न देवान्नैव दितिजान्न गन्धर्वान्न मानुषान् |  १८   क
अरोचय़ं वरकृते तथैव वहुलानृषीन् ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति