सभा पर्व  अध्याय १६

कृष्ण उवाच

ततस्ते भरतश्रेष्ठ काशिराजसुते शुभे |  ४९   क
तं वालमभिपत्याशु प्रस्नवैरभिषिञ्चताम् ||  ४९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति