menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शल्य पर्व
अध्याय ५५
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
उदपानगताश्चापो व्यवर्धन्त समन्ततः |  १४   क
अशरीरा महानादाः श्रूय़न्ते स्म तदा नृप ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति