आदि पर्व  अध्याय ९६

वैशम्पाय़न उवाच

ते त्विषून्दशसाहस्रांस्तस्मै युगपदाक्षिपन् |  २०   क
अप्राप्तांश्चैव तानाशु भीष्मः सर्वांस्तदाच्छिनत् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति