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आदि पर्व
अध्याय ९६
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वैशम्पाय़न उवाच
लाघवं तस्य ते दृष्ट्वा संय़ुगे सर्वपार्थिवाः |  ३४   क
अपूजय़न्त संहृष्टा वाग्भिः शाल्वं नराधिपाः ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति