अनुशासन पर्व  अध्याय १४५

वासुदेव उवाच

ईदृशः स महादेवो भूय़श्च भगवानतः |  ४१   क
न हि शक्या गुणा वक्तुमपि वर्षशतैरपि ||  ४१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति