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आदि पर्व
अध्याय ९६
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वैशम्पाय़न उवाच
स विनिश्चित्य धर्मज्ञो व्राह्मणैर्वेदपारगैः |  ५१   क
अनुजज्ञे तदा ज्येष्टामम्वां काशिपतेः सुताम् ||  ५१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति